
रूसी तेल पर छूट समाप्त करने के बाद अब अमेरिका ईरान के तेल पर भी सख्ती बढ़ा रहा है, जिससे भारत जैसे प्रमुख खरीदार प्रभावित हो सकते हैं।
ट्रंप प्रशासन ने पिछले महीने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दी थी, जो अब बीते सप्ताह खत्म हो चुकी है।
अमेरिका ने खत्म की तेल पर छूट
अमेरिकी ट्रेज़री सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि 11 मार्च 2026 से पहले समुद्र में मौजूद तेल पर दी गई सभी अस्थायी रियायतें अब समाप्त हो चुकी हैं।
इसका मतलब है कि अब रूस और ईरान से जुड़े तेल पर पहले जैसी राहत नहीं मिलेगी।
भारत पर क्या होगा असर?
- भारतीय रिफाइनरियों को सस्ते तेल की उपलब्धता में कमी आ सकती है
- वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदना महंगा पड़ सकता है
- कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है
भारत लंबे समय से रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर अपने आयात बिल को संतुलित कर रहा था, लेकिन अब यह रणनीति चुनौती में आ सकती है।
पहले भी लगा था भारी टैरिफ
गौरतलब है कि अगस्त 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया था।
इसमें 25% अतिरिक्त टैरिफ रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया था।
यह फैसला पहले ही भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ा चुका है।

आगे क्या होगा?
- भारत को अब मध्य पूर्व, अफ्रीका और अमेरिका जैसे नए स्रोतों पर निर्भर होना पड़ सकता है।
- ऊर्जा लागत बढ़ने से महंगाई पर असर पड़ सकता है।
- सरकार को नई ऊर्जा रणनीति बनानी पड़ सकती है।
अमेरिका के सख्त फैसलों ने वैश्विक तेल बाजार में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।
भारत के लिए यह समय अपनी ऊर्जा रणनीति को मजबूत करने और वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करने का है।

